Thursday, November 11, 2010

जलवा

खबर है कि दिल्ली में जितने इंसान दिखते हैं, उससे ज्यादा संख्या मोबाइलों की है। दिल्ली में कुल इंसानों की तादाद 1 करोड़ 83 लाख है, पर मोबाइलों की संख्या इससे 1 करोड़ ज्यादा यानी 2 करोड़ 83 लाख है।
आदमी कम हैं, मोबाइल ज्यादा है। वैसे दिल्ली में आदमी कम ही हैं, दिखते भर ज्यादा हैं। दिल्ली में आम तौर पर आदमी इतनी स्पीड से भागता दौड़ता रहता है कि वह आदमी कम, मोबाइल ज्यादा लगता है। जैसे आदमी-आदमी में फर्क है, वैसे ही मोबाइल-मोबाइल में फर्क है।

आदमी-आदमी के स्टेटस में फर्क है और मोबाइल-मोबाइल स्टेटस में फर्क है। मोबाइल स्टेटस को लेकर कई लोगों में कई भ्रांतियां हैं। इस कॉलम में उन भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की गई है। निम्नलिखित सवाल-जवाबों से अपनी भ्रांतियां दूर करें।
सवाल: मैंने 70,000 रुपये का मोबाइल खरीदा है। इससे अपना जलवा कैसे कायम किया जा सकता है।
जवाब: देखिए इसे जेब में रखकर न चलें। खुलेआम हाथ में रखकर घूमा करें। हो सकता है कि इससे मोबाइल की सेफ्टी कुछ कम हो जाए, पर इससे आपका स्टेटस बढ़ लेगा। स्टेटस चाहिए, तो सेफ्टी पर आपको कंप्रोमाइज करना होगा। जहां भी कोई बंदा नजर आ जाए, फौरन मोबाइल हाथ में लेकर मोबाइल पर कुछ बात करने का अभिनय करिए।
बीच-बीच में सामने वाले बंदे की ओर भी देखते रहिए। वह कुछ न कहे, तो अपनी तरफ से कहिए - इत्ता महंगा मोबाइल, फिर भी सारे फीचर नहीं हैं। यह सुनकर सामने वाले में अगर थोड़ी भी तमीज होगी, तो वह पूछेगा - कित्ते का लिया। तब फौरन आप जुट जाइए, यह बताने में कि 70,000 का है। बहुत महंगा है। इसमें ये ये फीचर हैं। आदमी को फाइल बनाकर ई-मेल कर सकते हैं इस मोबाइल से।

इस मोबाइल में लता मंगेशकर का गाना ऐसे आता है, मानो वह मोबाइल से बाहर निकल कर आपके लिए खुद गाने लगती हैं। जब सुनने वाला थोड़ा चकराए, तो आप कहिए, ये सारे फीचर्स बताए गए हैं। अभी टेस्ट करके नहीं देखे हैं। फिर आप बताइए कि मोबाइल फोन तो ऐसा होना चाहिए, जिसमें आदमी की आवाज ही नहीं, खुद आदमी निकल कर बाहर आ जाए। अगर आपके 70,000 के मोबाइल के बारे में फिर भी कोई न पूछे, तो इसके म्यूजिक प्लेयर को फुल वॉल्यूम के साथ ऑन कर दीजिए और उसमें 'मुन्नी बदनाम हुई' या इसी प्रजाति का कोई गाना बजाइए।

फुल वॉल्यूम सुनकर कुछ लोग ऑबजेक्शन करेंगे, तो उन्हे बताइए कि यह बहुत महंगा वाला मोबाइल है 70,000 रुपये का। इसके म्यूजिक प्लेयर को ऑन करना तो उन्हें आता है, पर ऑफ करना नहीं आता।

सवाल: मेरे पास 1,000 रुपये वाला मोबाइल है। इससे स्टेटस कैसे बनाया जा सकता है।
जवाब: यू चिरकुट, 1,000 रुपये में स्टेटस बनाएगा। इस मोबाइल से कम से कम बात की जाए और बात करने के फौरन बाद इसे जेब में रख लिया जाए। ये मोबाइल किसी को दिखना नहीं चाहिए। वरना लोग आपको दो कौड़ी का आदमी समझने लगेंगे। आजकल बंदे का कैरेक्टर नहीं, मोबाइल देखा जाता है। अच्छे कैरेक्टर वालों के मोबाइल अच्छे नहीं होते, और बुरे कैरेक्टर वालों के मोबाइल बुरे न होते।

यानी अपना कैरेक्टर खराब करने में लग जाएं, स्मगलिंग जैसे किसी काम की तरफ रुख करें। स्टेटस के साथ मोबाइल भी सुधर जाएगा। जी, आजकल के टाइम में कोई आदमी या ना सुधरे, मोबाइल जरूर सुधरा हुआ होना चाहिए।

5 comments:

  1. "आजकल बंदे का कैरेक्टर नहीं, मोबाइल देखा जाता है"

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  2. बहुत अच्छा पोस्ट, आज कल हम लोग केवल झूठी शान दिखाने में लगे है, जबकि इंसान की असली पहचान उसके चरित्र से होती है न कि इन कृत्रिम वस्तुओं से.......
    sparkindians.blogspot.com

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  3. प्रतिभाजी, इस ब्लागजगत में आपका स्वागत है । आप अगस्त माह से लिख रही हैं किन्तु चिट्ठाजगत ने आपके बारे में अब जानकारी दी । इस देरी का क्या कोई विशेष कारण ?

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  4. बहुत खूब प्रतिभा जी |

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