. और ख़त्म हो गया नालंदा विश्वविद्यालय......
नालंदा विश्वविद्यालय, वास्तव में उसका नाम नालंद था, जिस तरह अंग्रेजी के कारण योग को योगा, मिश्र को मिश्रा आदि बना दिया ऐसे ही नालंद के नाम में भी परिवर्तन हुआ | नालंद का संधि विग्रह है न + आलम+ द | अलम शब्द का अर्थ है पर्याप्त ,इस प्रकार उसका अर्थ हुआ पर्याप्त से अधिक शिक्षा देने वाला | वैसे नालंदा के बारे में काफी पढ़ा... था और सुना था लेकिन ये नहीं पता की उसका विनाश कैसे हुआ ? अभी पढ़ा तो पता लगा की अलाउद्दीन खिलजी के भतीजे बख्तियार खिलजी ने इस विश्विद्यालय को समाप्त कर दिया, नालंदा की इमारत को ज़मिदोज़ करा कर वहाँ के छात्र ,आचार्यों को मार दिया | वहाँ के पुस्तकालय में आग लगा दी गयी, और वहाँ का पुस्तकालय पुस्तकों से इतना समृद्ध था की वहाँ लगी आग छह महीने तक जलती रही थी |
इसे पढ़ कर दिमाग में एक प्रश्न आया की पुस्तकालय को यदि न जलाया गया होता तो कितनी कीमती और ज्ञानवर्धक पुस्तकें आज हमारे पास मौजूद होती | क्योकि कहा जाता है की किसी देश का साहित्य या पुस्तकें/ग्रन्थ/ उसकी अमूल्य धरोहर होती है और संस्कृतिक सम्पन्नता को प्रदर्शित करती है | इसके बाद एक प्रश्न और कौंधा की जब मुगलों ने इतने अत्याचार हमारे देश पर किये है तो हम क्यों पांचवी कक्षा से बी.ए., एम.ए और आगे भी हम इन मुगलों को पढ़ रहे है क्या ये एक ज़ख्म कुरेदने जैसा नहीं है, और जो पढ़ रहे है वो भी वास्तविकता नहीं है ज्यादातर बातें छुपा दी गयी जैसे उनका धर्म परिवर्तन करना, न मानने पर सर कलम कर देना, मंदिरों को तोडना, और उनको लूटना,हिन्दू प्रजा पर अन्यों के मुकाबले दोगुना कर लगाना,ज्यादातर धार्मिक त्योहारों पर रोक लगा देना , आदि आदि | समझ नहीं आता की क्यों हमारी सरकार या शिक्षा संस्थान कोई वाजिब कदम उठा कर शिक्षा का स्वरुप नहीं बदलते ? क्या हमारा इतिहास सिर्फ मुगलों तक सीमित था, क्या हमारा हमारे पास मुगलों को पढने के अलावा कोई और चारा नहीं है | हर देश में स्वतंत्रता के बाद हर उस चीज़ के निशाँ मिटाए जाते है जो गुलामी के प्रतीक होते है और एक हम है जो सिर्फ गुलामी के प्रतीकों को अपने भविष्य में ढ़ो रहे है,और संजो के रख रहे है .
प्रतिभा जी आप ने बिल्कुल ठीक कहा है। जहॉं मेरा आवास है वहॉं से नालन्दा बमुिश्कल दस किलोमीटर की दूरी पर है। पर आपके एक बात से सहमत नहीं हुंं मै। इतिहास होता ही इसलिए है कि हम उसकी अच्छाईयों और बुराईयों के बारे में जान पाए। अब आप ही सोचिए कि अगर हम ये सारी चीजें पढ़े नहीं होते तो हमें पता कैसे चलता कि इन मुसलमान हमलावरों ने कितने जुल्म किये थे। अगर कुछ ज्यादा लिख दिया हो तो माफ किजिएगा।
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