आज सुबह से ही किसी बात को लेकर मैं टेंशन में थी तो अचानक मन में ये बात आई कि आखिर ये टेंशन क्यों होती है ? तो सोचा क्यों ना टेंशन को मेंशन किया जाये वैसे दोस्तों कमाल की चीज़ है ये टेंशन..इसके जलवे तो हर जगह देखने को मिलते है माफ़ कीजिए ये तो कहानी घर घर कि है और तो और कोई हीरो हिरोइन पॉपुलर हो ना हो जनाब ये टेंशन बहुत मशहूर होती जा रही है खास तौर से शहरों में !कभी अपने पुराने मित्रो से मिलने जाओ तो मिलने कि ख़ुशी से ज्यादा उनकी टेंशन में होने कि कहानियां सुनने में समय बीत जाता है ,पड़ोसियों को सामने वाले के घर को देख टेंशन ,बच्चो को पढाई कि टेंशन,माँ बाप को बच्चो कि टेंशन , बीबी को घर पर रोज खाना बनाने की टेंशन ,पति को रोज़ काम पर जाने कि टेंशन, कवारों को शादी की टेंशन , लड़के को लड़की की टेंशन,,,इसकी टेंशन, उसकी टेंशन पता नहीं किस किस की टेंशन...........
ऊफ .... आखिर ये टेंशन होती क्यों है ? इसका जवाब देना मेरे लिए भी मुश्किल है क्योंकि मैं भी इस टेंशन की शिकार हूँ ,लेकिन दोस्तों शायद इसका जवाब हमारी खुद की ज़िन्दगी में मिल जाएगा ....वो कैसे ? तो सोचिए क्या हम पहले की तरह बाहर निकल कर खुली हवा में रहते है ,क्या माँ बाप अपने बच्चे को समय देते है ,क्या बच्चे कम्प्यूटर की दुनियां के आलावा किसी और को अपना दोस्त मानते है ...आज किसी के पास किसी के लिए समय नहीं है और बस अगर हमें कोई समय देता है या हम किसी को समय देते है तो वो केवल हमारे अपनी टेंशन को .........
आज भी मुझे वो समय याद है जब मैं ८ साल की थी और १५ अगस्त को अपने भईया के साथ छत्त पर पतंग उड़ाने गयी थी वो बात अलग है की मुझे हमेशा की तरह चरखी पकड़ा दी गयी लेकिन मुझे उस में भी बहुत ख़ुशी मिलती थी और सबसे ज्यादा उन रंग बिरंगी पतंगों को देख कर जो सारे आसमान को रंगीन कर देती थी और मैं भईया से कहती थी भईया आज तो लाखो पतंगे उड़ रही है ना ....अगर ये सारी पतंगे हमारे पास आ जाए तो कितना मज़ा आयेगा ना ... फिर मेरे भईया मेरी तरफ देख कर हंसने लगे ! वैसे आप सोच रहे होंगे की मैंने ये बात आपको क्यों बताई क्योंकि आज ना मुझे वो बच्चो की "आई बो" का शोर सुनाई देता है और ना ही वो रंगीन असमान दिखाई पड़ता है ! लोग कहते है शहर में समय चलता नहीं दौड़ता है और समय के साथ हमें दौड़ना पड़ता है लेकिन शायद इस दौड़ हम कही ना कही अपनी खुशियाँ ,अपने और अपने दोस्तों को पीछे छोड़ते जा रहे है बस आज कोई सबकी ज़िन्दगी में अव्वल है तो वो है टेंशन .....इसलिए अपनी ज़िन्दगी का थोडा समय अपने अपनों को दे ताकि इनकी जगह कोई टेंशन ना ले सके ....".ना टेंशन लेने का और ना किसी को देना का ".........
dilli ke her rang, her khushi,her gum ko hum pahuchaenge aap tak kyonki ye hai dilli ka dil dillidhadkan
Monday, October 25, 2010
Wednesday, October 20, 2010
कब सुधरेंगे ये पाकिस्तानी
वैसे तो मुझे भारत और पाकिस्तान के संबंधों में कई बातें समझ में नहीं आती, लेकिन यह बात बिल्कुल समझ में नहीं आती कि अचानक बैठे बिठाए बात प्यार, मुहब्बत और शांति से शुरु होते होते गाली-गलौज में कैसे बदल जाती है.कभी कभी तो मेरी समझ से बाहर हो जाता है कि हमारे देश को क्या हो जाता है .माफ़ किजिएगा इस देश को चलने वाले नेताओ को .जब देखो शरीफ बनने का ढोंग करते रहते है कभी पाकिस्तान के लिए इतना प्यार उमड़ जाता है कि जिसकी कोई सीमा नहीं वही पाकिस्तान पीठ में छुरा घोपने से बाज़ नहीं आता . वैसे आज मेरे एक मित्र के पास एक साईट पर फ्रेंड रिकुएस्त आई जिसे देख कर ऐसा लगा जैसे इन पाकिस्तानी बेशर्मो का कुछ नहीं हो सकता किसी ने सही कहा है लातो के भुत बातो से नहीं मानते .
भारत- हम पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिरता चाहते हैं. एक मज़बूत पाकिस्तान भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया के हित में है.
पाकिस्तान- हम भारत के साथ समग्र बातचीत का स्वागत करते हैं. दोनों देशों का नेतृत्व धीरे-धीरे सभी समस्याएं शांति प्रक्रिया के ज़रिए हल करने की क्षमता रखता है.
भारत- हम चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़े और वीज़ा नियमों में नरमी हो.
पाकिस्तान- यदि नियंत्रण रेखा की दोनों ओर से व्यापार और लोगों की अवाजाही में आसानी हो तो धीरे-धीरे सीमाएँ बे-मानी होती जली चाएँगी.
भारत- दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया अब पीछे नहीं जा सकती, लेकिन पाकिस्तान को सबसे पहले अपने यहाँ आतंकवाद के ख़िलाफ ठोस क़दम उठाने होंगे.
पाकिस्तान- दक्षिण एशिया को भारत और पाकिस्तान शांति का केंद्र बना सकते हैं, लेकिन भारत को बलोचिस्तान में हस्तक्षेप बंद करना होगा.
भारत- जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का अड्डा बना रहेगा, बातचीत का कोई फ़ायदा नहीं.
पाकिस्तान- भारत को आरोप-प्रत्यारोप से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए और इलाक़े में दादा बनने का शौक़ अपने मन से निकाल देना चाहिए.
भारत- अगर चीन और पाकिस्तान से एक ही समय पर युद्ध होता है तो भारत दोनों का एक साथ मुक़ाबला करने की क्षमता रखता है.
पाकिस्तान- जनरल दीपक कपूर को अच्छी तरह पता है कि पाकिस्तान क्या कर सकता है और भारतीय सेना कितने पानी में है.
भारत- अब तक सीमा पार से आतंकवाद हो रहा है. अमेरिका और अन्य शक्तियाँ पाकिस्तान को समझाएँ कि वह आग से न खेले.
पाकिस्तान- जिस प्रकार से हम ने पाकिस्तान हासिल किया है उसी प्रकार से कशमीर भी हासिल करेंगे. चाहे हज़ार साल तक युद्ध क्यों न करना पड़े.
भारत- क्या पाकिस्तान भूल गया कि सन् 71 में क्या हुआ था. क्या उसे दोबारा याद दिलाना पड़ेगा.
पाकिस्तान- हमारी ओर जो भी मैली आँख से देखेगा वह आँख निकाल दी जाएगी.
भारत- पाकिस्तान अपने क़द से बड़ी बात करने से पहले अपने घर की आग तो बुझाले.
पाकिस्तान- अबे तेरी तो....
भारत- अबे तेरी ऐसी की तैसी.....
(यदि भारत और पाकिस्तान किसी अच्छे मनोचिकित्सक से संपर्क करने पर तैयार हो जाएँ तो इलाज के पैसे मैं अपनी जेब से देने को तैयार हूँ.)
भारत- हम पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिरता चाहते हैं. एक मज़बूत पाकिस्तान भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया के हित में है.
पाकिस्तान- हम भारत के साथ समग्र बातचीत का स्वागत करते हैं. दोनों देशों का नेतृत्व धीरे-धीरे सभी समस्याएं शांति प्रक्रिया के ज़रिए हल करने की क्षमता रखता है.
भारत- हम चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़े और वीज़ा नियमों में नरमी हो.
पाकिस्तान- यदि नियंत्रण रेखा की दोनों ओर से व्यापार और लोगों की अवाजाही में आसानी हो तो धीरे-धीरे सीमाएँ बे-मानी होती जली चाएँगी.
भारत- दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया अब पीछे नहीं जा सकती, लेकिन पाकिस्तान को सबसे पहले अपने यहाँ आतंकवाद के ख़िलाफ ठोस क़दम उठाने होंगे.
पाकिस्तान- दक्षिण एशिया को भारत और पाकिस्तान शांति का केंद्र बना सकते हैं, लेकिन भारत को बलोचिस्तान में हस्तक्षेप बंद करना होगा.
भारत- जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का अड्डा बना रहेगा, बातचीत का कोई फ़ायदा नहीं.
पाकिस्तान- भारत को आरोप-प्रत्यारोप से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए और इलाक़े में दादा बनने का शौक़ अपने मन से निकाल देना चाहिए.
भारत- अगर चीन और पाकिस्तान से एक ही समय पर युद्ध होता है तो भारत दोनों का एक साथ मुक़ाबला करने की क्षमता रखता है.
पाकिस्तान- जनरल दीपक कपूर को अच्छी तरह पता है कि पाकिस्तान क्या कर सकता है और भारतीय सेना कितने पानी में है.
भारत- अब तक सीमा पार से आतंकवाद हो रहा है. अमेरिका और अन्य शक्तियाँ पाकिस्तान को समझाएँ कि वह आग से न खेले.
पाकिस्तान- जिस प्रकार से हम ने पाकिस्तान हासिल किया है उसी प्रकार से कशमीर भी हासिल करेंगे. चाहे हज़ार साल तक युद्ध क्यों न करना पड़े.
भारत- क्या पाकिस्तान भूल गया कि सन् 71 में क्या हुआ था. क्या उसे दोबारा याद दिलाना पड़ेगा.
पाकिस्तान- हमारी ओर जो भी मैली आँख से देखेगा वह आँख निकाल दी जाएगी.
भारत- पाकिस्तान अपने क़द से बड़ी बात करने से पहले अपने घर की आग तो बुझाले.
पाकिस्तान- अबे तेरी तो....
भारत- अबे तेरी ऐसी की तैसी.....
(यदि भारत और पाकिस्तान किसी अच्छे मनोचिकित्सक से संपर्क करने पर तैयार हो जाएँ तो इलाज के पैसे मैं अपनी जेब से देने को तैयार हूँ.)
Friday, October 15, 2010
यौन शोषण के शिकार होते बच्चे
कल पूरे दिन हर न्यूज़ चैनल में एक ही खबर छाई थी कि दिल्ली में कैसे एक व्यक्ति ७ महीनो से तीन बच्चो को अपनी हवस का शिकार बना रहा था और माता पिता को पता भी नहीं चला वैसे ये कोई नयी खबर नहीं है क्योंकि आज हर दूसरा बच्चा अपनों का ही शिकार बन रहा है ! वैसे देखा जाए तो देश में अगर किसी बच्चे के साथ यौन शोषण होता है तो उसके लिए अलग से कोई कानून नहीं है। एक वयस्क के साथ होने वाले यौन शोषण मामले में जो कानूनी प्रावधान है वही प्रावधान बच्चों के यौन शोषण के मामले में भी है। जबकि सरकार को भी ये अच्छी तरह पता है कि भारत में हर दूसरा बच्चा यौन शोषण का शिकार होता है।
बच्चों के यौन शोषण को रोकने के लिए तीन साल पहले ऑफेंसेज अगेंस्ट चाइल्ड बिल तैयार कर दिया गया है लेकिन ये बिल तीन साल से ठंडे बस्ते में पड़ा है। जबकि सरकार के अपने ही आंकड़ों के मुताबिक देश भर में पांच साल से ज्यादा उम्र के 53 फीसदी बच्चे किसी न किसी तौर पर यौन शोषण के शिकार होते हैं लेकिन शर्म कि बात तो यह है कि सरकार सब जानने के बाद भी कोई सख्त कदम नहीं उठाती वैसे सरकार पर निर्भेर रहने से अच्छा माता पिता को ही अपने बच्चो की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए !
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