Tuesday, January 11, 2011

सपने बेशकीमती होते हैं.........

सपने बेशकीमती होते हैं लेकिन उन्हें देखने के लिए कीमत नहीं देनी पड़ती। और शायद इसलिए हम सब ढेर सारे सपने देखते हैं।
हम सभी ना जाने बंद आँखों या खुली आँखों से कितने ही सपने देखते है,कुछ पाने का सपना तो कुछ बनने का सपना ......कहते है सपने कभी सच नहीं होते लेकिन मेरा मानना है सपने तो सब देखते है लेकिन कुछ ऐसे होते है जो सपने सिर्फ सच करने के लिए देखते है ...ऐसी ही एक कहानी है शरद की, सरद बाबू आईआईएम अहमदाबाद से पोस्ट ग्रैजुएट। बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग ग्रैजुएट। फूड किंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम से केटरिंग कंपनी के मालिक। लेकिन एक दिन ऐसा भी था जब सालाना 8 करोड़ टर्नओवर वाली इस कंपनी का मालिक जो आज एक टाइम पर 5 हजार लोगों को खाना खिलाता है वो इतना भूखा था कि उसे चींटी के मुंह से नमकीन का दाना छीन कर खाना पड़ा था। शरद कहते है जब मैं 7 साल का था तो मेरी मां की हर महीने जब सैलरी आती थी तो वो मुझे भुजिया लेकर देती थीं। हम पांच भाई-बहन थे तो हमें अखबार पर थोड़ा-थोड़ा भुजिया मिलता था। लेकिन हम सभी में कॉम्पटीशन चलता था। मैं अपना भुजिया जल्दी से खाकर ये देख रहा था कि अब मुझे कौन देगा। तभी मैंने देखा उधर से एक चींटी भुजिया का एक दाना लेकर जा रही थी तो मैंने उससे नमकीन का एक दाना छीना और तुरंत खा लिया ....शरद जैसे ना जाने इतने ही लोग है जो गरीबी में रहकर कुछ कर दिखाते है लेकिन कुछ ऐसे भी है जो अपने सपने पूरे करना तो चाहते है लेकिन गरीब होने के कारण कर नहीं पाते .........इसलिए सपने देखना कभी मत छोड़ो लेकिन उसे बस सपने मत रहने दो ..............

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