Monday, October 25, 2010

इसकी टेंशन, उसकी टेंशन पता नहीं किस किस की टेंशन...........

आज सुबह से ही किसी बात को लेकर मैं टेंशन में थी तो अचानक मन में ये बात आई  कि आखिर ये टेंशन क्यों होती है ? तो सोचा क्यों ना टेंशन को मेंशन किया जाये  वैसे दोस्तों कमाल की चीज़ है ये टेंशन..इसके जलवे तो हर जगह देखने को मिलते है माफ़  कीजिए  ये तो कहानी घर घर कि है  और तो और कोई हीरो हिरोइन पॉपुलर  हो ना हो जनाब  ये टेंशन बहुत मशहूर होती जा रही है खास तौर से  शहरों में !कभी अपने पुराने मित्रो से मिलने जाओ तो मिलने कि ख़ुशी से ज्यादा उनकी टेंशन में होने कि कहानियां  सुनने में समय बीत जाता है ,पड़ोसियों को सामने  वाले के घर  को देख टेंशन ,बच्चो  को पढाई कि टेंशन,माँ बाप को बच्चो कि टेंशन , बीबी को घर पर रोज खाना बनाने की  टेंशन ,पति को रोज़ काम पर जाने कि टेंशन, कवारों को शादी की टेंशन , लड़के को लड़की की टेंशन,,,इसकी टेंशन, उसकी टेंशन पता नहीं किस किस की टेंशन...........
        ऊफ .... आखिर ये टेंशन होती क्यों है ? इसका जवाब देना मेरे लिए भी मुश्किल है क्योंकि मैं भी इस टेंशन की शिकार हूँ ,लेकिन दोस्तों शायद इसका जवाब हमारी खुद की ज़िन्दगी में मिल जाएगा ....वो कैसे ? तो सोचिए क्या हम पहले की तरह बाहर निकल कर खुली हवा में रहते  है ,क्या माँ बाप अपने बच्चे को समय देते है ,क्या बच्चे कम्प्यूटर की दुनियां  के आलावा किसी और  को अपना दोस्त मानते है ...आज किसी के पास किसी के लिए समय नहीं है  और बस अगर  हमें कोई समय देता है या हम किसी को समय देते है तो वो केवल हमारे अपनी टेंशन को .........
आज भी मुझे वो समय याद है जब मैं ८ साल की थी और १५ अगस्त को अपने भईया के साथ छत्त पर पतंग उड़ाने गयी थी वो बात अलग है की मुझे हमेशा की तरह चरखी पकड़ा दी गयी  लेकिन मुझे उस में भी बहुत ख़ुशी मिलती थी और सबसे ज्यादा उन रंग बिरंगी पतंगों को देख कर जो सारे आसमान को रंगीन कर देती थी और मैं भईया से कहती थी भईया आज तो लाखो पतंगे उड़ रही है ना ....अगर ये सारी पतंगे हमारे पास आ जाए तो कितना मज़ा आयेगा ना ... फिर मेरे भईया मेरी तरफ देख कर हंसने  लगे ! वैसे आप सोच रहे होंगे की मैंने ये बात आपको क्यों बताई क्योंकि आज ना मुझे वो बच्चो की "आई बो" का शोर  सुनाई देता  है और ना ही वो रंगीन असमान दिखाई पड़ता है ! लोग कहते है शहर में समय चलता नहीं  दौड़ता है और समय के साथ हमें दौड़ना पड़ता है लेकिन  शायद इस दौड़ हम कही ना कही अपनी खुशियाँ ,अपने और अपने दोस्तों को पीछे छोड़ते जा रहे है बस आज कोई सबकी ज़िन्दगी में अव्वल  है तो वो है टेंशन .....इसलिए अपनी ज़िन्दगी का थोडा समय अपने अपनों को दे ताकि इनकी जगह  कोई टेंशन ना ले सके ....".ना टेंशन लेने का और ना किसी को देना का ".........

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